मित्रों हमारा जीवन बहुमूल्य होता है इसका कारण यह है कि हमको कई हजारों युनियों से गुजरने के बाद कही एक बार इंसान के रूप में जन्म होता है ऐसे में लोग अपनी जिन्दगी के साथ खिलवाड़ करते है जो बहुत ही गलत है। पहले के लोग तो ऐसे नही थे पर आज के समय में परिवार में थोड़ी सी अगर कहासुनी हुई तो अधिकतर लोग आत्म हत्या करने का प्रयास करने लगते है, जो कि घोर आपराध है जिसे हत्या करने से भी बड़ा अपराध माना जाता है। इसी क्रम में आज हम एक ऐसी ही घटना के संबंध में बात करने वाले है, जिसमें IIT की एक छात्र ने परेशान होकर अपनी माँ को पत्र लिखकर ऐसा कदम उठाया जिसे सुन उसकी माँ सोच में पड़ गई।     

दरअसल इस बात में तो कोई दो राय नही है कि आज के समय में बच्चे कई तरह के दबाव में जीवन जीते हैं। जी हाँ ऐसे कई बच्चें होते जिन्हें जिंदगी आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में माता-पिता का प्यार नहीं मिल पाता, तो वहीं पढ़ाई और करियर का दबाव रहता सो अलग। बता दें ऐसे ही कुछ माहौल से गुजर रहा था सार्थक, जिसके बाद उसने फांसी लगाना उचित समझा। गौरतलब हो की कि सार्थक का छोटा भाई वात्सल्य आईटी की कोचिंग के लिए गया हुआ था। मां अहमदाबाद में थी और पिता जॉब पर गए थे। ऐसे में जिस वक्त यह घटना हुई उस वक्त घर में मौजूद कुत्ता बहुत देर से भौंक रहा था, पर पड़ोसियों का ध्यान सार्थक के इस काम की ओर नहीं गया। वैसे भी महानगरी जीवनशैली में कहाँ किसी के पास समय होता है, ऐसा ही कुछ हुआ सार्थक के मामले में।

बता दें कि पड़ोसियों के अनुसार यह घटना बुधवार देर रात 11:00 बजे के करीब हुई। वहीं जब कॉलोनी के अंदर एंबुलेंस और पुलिस के सायरन की आवाज सुनाई दी। इसके बाद आसपास में रहने वाले लोगों ने घर से बाहर जाकर देखा, तो सार्थक के घर के बाहर भीड़ थी। कुछ देर बाद पता लगा कि सार्थक ने घर के पीछे बनी बालकनी में फांसी लगा ली है। वहीं रहवासियों ने बताया कि 2 साल पूर्व विजित कुमार अपने परिवार के साथ एनवीडीए कॉलोनी में रहने आए थे। परिवार आसपास वालों से अधिक बातें नहीं किया करता था। दोनों भाई सिर्फ पढ़ाई में ही लगे रहते थे। इसके अलावा पुलिस ने बताया कि नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण के सरकारी आवास में रहने वाले अपर संचालक विजित कुमार विजयवत के बेटे सार्थक ने फांसी लगा ली। सार्थक खड़गपुर से आईआईटी कर रहा था। कुछ दिनों पहले ही इंदौर आया था।

आपकी जानकारी के लिये बता दें कि सार्थक ने एक सुसाइड नोट लिखा है, जिसमें सबसे अंत में आई क्विट तो पहले और अंदर कई बातें लिखी हुई हैं। उसने लिखा है कि उसने कई उम्मीदों से जेईई की तैयारी की थी। सोचा था कैम्पस एंजाय करूंगा, लेकिन ऑनलाइन असाइनमेंट के चक्कर में फंस गया। उसने लिखा कि पापा जिद्दी हैं और मम्मी मजबूर… उन्हें मुझसे और छोटे भाई वात्सल्य के साथ भी ऐसी बात करनी चाहिए थी, जैसी बात वे अपने भाई और बहनों के साथ करते थे। इसके अलावा सार्थक ने पिता के बारे में लिखा है कि काश! आप हमारे साथ और भी समय बिताते। देवेंद्र काका जैसी समझ आपमें होती।

हालांकि सार्थक ने किसी पर आरोप नहीं लगाए हैं और ना ही किसी को मौत का जिम्मेदार ठहराया है। बताया जाता है कि कैम्पस सिलेक्शन को लेकर भी वह डिप्रेशन में बताया जा रहा था। वह इंदौर में अपने परिवार के साथ ही रहना चाहता था, पर पढ़ाई के चलते उसे बाहर जाना पड़ा। ऐसे में उसकी मौत का कारण जहां अकेलापन रहा। वहीं, पढ़ाई को लेकर पिता का दबाव लगातार बना रहता था, जिसे वह सहन नहीं कर पाया और उसने फांसी लगा ली। इस जानकारी के संबंध में आप लोगों की क्‍या प्रतिक्रियायें है? कमेंट बॉक्‍स में अवश्‍य लिखें। मित्रो अधिक रोचक बाते व लेटेस्‍ट न्‍यूज के लिये आप हमारे पेज से जुड़े और अपने दोस्तो को भी इस पेज से जुड़ने के लिये भी प्रेरित करें।

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