पैसों के लिए कोई शख्स किस हद तक जा सकता है इसका अंदाज़ा आप हमारी इस पोस्ट के जरूर लगा सकते हैं जिसमे हम आपको भारत के एक बेहद सफल बिजनेसमैन के बारे में बताने जा रहे हैं जिनके खुद के बेटे नें कुछ ऐसा कर डाला जिसके बारे में सोचकर इंसान शर्मसार हो जाए| ये कोई और नही बल्कि देश के मशहूर और बेहद सफल बिजनेसमैन विजयपत सिंघानिया हैं जिन्होंने देश के एक सबसे बड़े क्लोथिंग ब्रांड रेमंड को खड़ा किया था लेकिन आज ये अपनी जिंदगी के एक बेहद ख़राब वक्त से गुजर रहे हैं…

विजयपत सिंघानिया की बात करें तो एक जमाने में वह मुकेश अंबानी के एंटीलिया से भी ऊंचे जेके हाउस में रहा करते थे| पर आज ऐसी स्थिति बन गई है आज उन्हें अपने इस घर को पाने के लिए मुंबई हाई कोर्ट के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं| और कभी करोड़ों की गाड़ियों में चलने वाले विजयपत सिंघानिया आज पैदल चलने के लिए मजबूर हैं और उन्होंने ऐसा दावा भी किया है कि उनके बेटे ने उनसे उनकी गाड़ी और ड्राइवर भी छीन लिए हैं| और इन दिनों वो दक्षिणी मुंबई के एक किराए के मकान में जिंदगी जी रहे हैं|

जानकारी के मुताबिक साल 2015 में विजयपत सिंघानिया ने अपनी कंपनी के सारे शेयर बेटे गौतम सिंघानिया के नाम कर दिए थे जिनकी कीमत उस वक्त लगभग 1000 करोड रुपए थी| इसके अलावा मालाबार हिल्स में बने हुए जेके हाउस में साल 1960 में कुल 14 फ्लोर थे| इसके बाद साल 2007 में हुए एक रिनोवेशन के बाद अब इसमें कुल 37 फ्लोर बन गए हैं|

जब यह डील की गई थी तब यह बात तय हुई थी के इस रिनोवेशन के बाद कुल 4 डुप्लेक्स बनाए जाएंगे जिन्हें विजयपत सिंघानिया, गौतम सिंघानिया, अजयपत सिंघानिया की पत्नी बीना देवी और उनके दो बच्चों को दिए जाएंगे| लेकिन बाद में विजयपत सिंघानिया द्वारा अपने बेटे पर ऐसे आरोप लगाए गए हैं कि उन्होंने उन चारों डुप्लेक्स को अपने नाम कर लिया है|

साल 1925 में बनी रेमंड कंपनी ने साल 1958 में मुंबई में अपना पहला रिटेल शोरूम खोला था| इसके बाद साल 1980 में विजयपत सिंघानिया को रेमंड कंपनी संभालने का मौका मिला था|

इसके लगभग 6 साल बाद सिंघानिया ने साल 1986 में पार्क एवेन्यू नाम के रेमंड के प्रीमियम ब्रांड को लॉन्च किया था और इसके बाद साल 1990 में अपनी का पहला विदेशी शोरूम लांच किया था इसके बाद कंपनी ने गजब की ऊंचाई हासिल की थी|

बीते वक्त की बात करें तो विजयपत सिंघानिया अपने ही बेटे के खिलाफ केस लड़ने के लिए कोर्ट पहुंचे थे| इस दौरान उन्होंने अपने बेटे से घर की मांग की थी और साथ ही कंपनी के नियमों के तहत हर महीने 7 लाख रुपयों की भी डिमांड की थी|

हालांकि जून 2017 में हुई एक एनुअल जनरल मीटिंग के दौरान उनकी डुप्लेक्स और 7 लाख रुपए महीने की डिमांड शेयर होल्डर द्वारा ठुकरा दी गई थी जिसका खुलासा कोर्ट में पेश हुए वकील जनक द्वारकादास द्वारा किया गया था|

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